दिल्ली में हिंसा के लिए इस्तेमाल हुई टूलकिट केस की जांच में साइबर सेल जुटी है. साइबर सेल ने बताया है कि जब घटनाक्रम को देखा गया तो पता चला कि घटना को हु ब हू वैसे ही अंजाम दिया गया, जैसा कि टूलकिट में लिखा था.

दिशा ने ही ग्रेटा थनबर्ग को भेजी थी टूलकिट, ट्रैक्टर मार्च हिंसा से पहले हुई जूम मीटिंग में शामिल थे करीब 70 लोग

साइबर सेल के जाइंट कमिश्नर प्रेमनाथ

दिल्ली ट्रैक्टर मार्च हिंसा के बाद चर्चा में आई टूलकिट (Toolkit Case) पर साइबर पुलिस क्या कार्रवाई कर रही है, आज इसकी जानकारी दी गई. प्रेमनाथ ,जॉइंट कमिश्नर, साइबर सेल की तरफ से बताया गया कि टूलकिट में दिशा रवि (Disha Ravi), निकिता जैकब (Nikita Jacob) और शांतनु का क्या रोल था. साइबर सेल के मुताबिक, टूलकिट में जैसा लिखा था हिंसा ठीक उसी तरह हुई. इतना ही नहीं यह भी बताया गया कि दिशा रवि ने ही टूलकिट ग्रेटा थनबर्ग को भेजी थी, जिसे ग्रेटा ने गलती से ट्वीट कर दिया जबकि इसे कुछ गिनती के लोगों के बीच ही रहना था.

साइबर सेल ने बताया कि 26 जनवरी को कई बॉर्डर और दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में जो हिंसा हुई, उसमे कई फेक न्यूज सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, तभी टूलकिट के बारे में जानकारी मिली, जिसमें ट्विटर पर ट्वीट्स की झड़ी लगाने को लेकर तमाम स्ट्रोम लेकर तमाम निर्देश थे. टूलकिट एक ऐसा डॉक्यूमेंट था, जो कुछ लोगों के बीच शेयर होना था लेकिन ग्रेटा ने गलती से ये ट्वीट कर दिया.

बताया गया कि दिशा रवि ने ही वह टूलकिट ग्रेटा थनबर्ग को टेलीग्राम पर भेजी थी. यह भी बताया गया कि दिशा के मोबाइल से काफी सबूत मिले हैं, लेकिन काफी डेटा डिलीट मिला है. इस बीच दिल्ली पुलिस की तरफ से यह भी कहा गया है कि टूलकिट केस में गूगल से जो सवाल किए गए थे, उसमें से कुछ से जवाब अभी नहीं मिले हैं.

निकिता जैकब तक कैसे पहुंची साइबर पुलिस

ज्वाइंट CP साइबर सेल ने बताया कि जांच के दौरान टूलकिट के ऑनलाइन मौजूद स्क्रीन शॉट्स की पड़ताल की गई है और जांच में प्राप्त जानकारी मिलते ही इस टूलकिट गूगल डॉक्यूमेंट की संपादक निकिता जैकब के खिलाफ सर्च वारंट जारी कर केस के आयोग समेत एक टीम को मुंबई भेजा गया.उनके पास से 2 लैपटॉप और 1 आईफोन मिला. जांच में ये भी बात सामने आई कि काव्य न्याय फाउंडेशन के संस्थापक एम ओ डालीवाल अपने कनाडा में रह रहे सहयोगी पुनीत के जरिए निकिता जैकब से संपर्क किया. उनका मकसद गणतंत्र दिवस से पहले और बाद में ट्विटर स्टॉर्म और डिजिटल स्टाइक करना था.

जब घटनाक्रम को देखा गया तो पता चला कि घटना को हु ब हू वैसे ही अंजाम दिया गया, जैसा कि टूलकिट में लिखा था. फिर जांच के बाद ही टूलकिट की एडिटर दिशा को गिरफ्तार किया गया था. साइबर सेल के मुताबिक, निकिता ने भी बताया कि वो शांतुनु और दिशा के संपर्क में थी.

पहले बना वॉट्सऐप ग्रुप, फिर जूम मीटिंग भी हुई

खालिस्तान समर्थक ग्रुप पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन जिसने टूलकिट को बनाया था, उसने ही निकिता से संपर्क किया था. पुलिस के मुताबिक, शांतनु भी टूलकिट बनाने वालों में शामिल था. फिर 23 दिसंबर को एक वॉट्सऐप ग्रुप भी बनाया गया था. बताया गया कि शांतनु महाराष्ट्र के बीड का रहने वाला है. वह एक NGO XR से जुड़ा है जिससे निकिता भी जुड़ी हुई है, वह पेशे से इंजीनियर है.

गणतंत्र दिवस से पहले इन लोगों की एक जूम मीटिंग भी हुई थी. इसमें निकिता के अलावा 60 से 70 लोग शामिल थे. कहा गया कि यह जूम मीटिंग 11 जनवरी को हुई थी. इसमें खालिस्तानी ग्रुप से जुड़ी कनेडियन महिला पुनीत के जरिये दिशा ,निकिता ,शांतनु और दूसरे लोगों को जोड़ा गया था. प्रेमनाथ ने कहा 11 जनवरी को काव्य न्याय फाउंडेशन ने जूम मीटिंग किया जिसमें निकिता, शांतनु ,धालीवाल और अन्य व्यक्तियों ने हिस्सा लिया। धालीवाल का मकसद किसानों के बीच असंतोष और गलत जानकारी फैलाना था। सर्च में पता चला कि निकिता, शांतनु और दिशा ने गूगल टूलकिट गूगल डॉक्यूमेंट बनाया था.

टूलकिट जांच में सामने आए कुछ नए नाम

टूलकिट की प्लानिंग के हिसाब से जो ट्वीट किए गए उसमें पीटर फेड्रिक को भी टैग किया गया था. वह भजन सिंह भिंडर के संपर्क में 2006 से है. भजन सिंह भिंडर खालिस्तानी है और पीटर फेड्रिक भी K2 से तालुख रखता है. पीटर फेड्रिक का नाम टूलकिट के रिसोर्स में क्यों डाला गया इसकी जांच चल रही है. पीटर फेडरिक ने ये प्लान किया था कि किसे हैशटैग करना है, किसे फॉलो करना है, कब क्या ट्वीट कराना है.

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