बंगाल के विधानसभा चुनाव (Bengal Election) में ‘हिंदू समहति’ ने जहां बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं वहीं असदुद्दीन ओवैसी ने ममता बनर्जी की. BJP का आरोप है कि ‘हिंदू समहति’ TMC की ‘बी’ टीम है.

Bengal Election 2021: 'हिंदू समहति' की एंट्री बंगाल की सियासत में बिगाड़ेगी BJP का खेल या फिर ममता होंगी फेल, जानिए इनसाइड स्टोरी

पश्चिम बंगाल (West Bengal) में चुनावी बिसात बिछ गई है. इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों (Assembly Election) में हर पार्टी अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए एड़ी चोटी का बल लगा रही हैं. अभी तक बंगाल में सिर्फ दो पार्टियों बीजेपी (BJP) और टीएमसी (TMC) में सीधा मुकाबला था लेकिन अब यहां एक और पार्टी मैदान में आ गई है. तपन घोष के इस पार्टी का नाम ‘हिंदू समहति’ (Hindu Samhati) है, जिसनें बंगाल के 170 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. माना जा रहा है कि इस पार्टी के पीछे ममता बनर्जी का हाथ है और उन्होंने इस पार्टी को बीजेपी के कोर हिंदू वोटरों में सेंध मारने के लिए खड़ा किया है. हालांकि कुछ दिन पहले जब असदुद्दीन ओवैसी बंगाल के चुनावी मैदान में उतरे थे तो उन पर भी कुछ ऐसे ही आरोप लग रहे थें. हालांकि उन्होंने साफ कर दिया था कि वह अपने दम पर बंगाल की जमीन पर ताल ठोकेंगे.

तपन घोष इससे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए थे उन्होंने 1975 से लेकर 2007 तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सेवा की है. हालांकि इसके बाद उनके और संघ के कुछ विचारों में मतभेद आया जिसके बाद फरवरी 2008 में उन्होंने हिंदू समहति नाम से अपना एक अलग संगठन बना लिया. तपन घोष की हिंदू समहति संगठन बंगाल में हिंदुओं के लिए काम करती है. इस संगठन का जिक्र साल 2017 में तब हुआ जब बसीरहाट में दंगे हुए और इस संगठन ने दंगों के दो नाबालिग आरोपियों को कानूनी मदद देने की बात की. साथ ही संगठन ने बंगाल के कई जिलों में ऐसे कार्यक्रम भी आयोजित कराए जिसमें मुस्लिम परिवारों ने इस्लाम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म को अपना लिया था. तपन घोष के इन्हीं कामों की वजह से बीजेपी को डर है कि कहीं उसका जो कोर हिंदू वोटर है वह हिंदू समहति के साथ ना चला जाए. अगर ऐसा हुआ तो इससे तृणमूल कांग्रेस को अच्छा फायदा होगा.

हिंदू समहति में कितना जोर है

हिंदू समहति पार्टी फिलहाल बंगाल में उतनी मुखरता से नहीं आई है. हालांकि 2017 के बाद से इस पार्टी ने बंगाल के दक्षिणी इलाकों में अपनी अच्छी पकड़ बनाई है. हिंदू समहति पार्टी ने ऐलान किया है कि वह इस साल के बंगाल विधानसभा चुनाव में 170 सीटों पर दावा पेश करेगी. लेकिन सवाल उठता है कि उसको इन सीटों में से कितनी सीटों पर जीत हासिल होगी. पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय जिस धुरी पर घूम रही है उसमें इस पार्टी को ज्यादा फायदा होते हुए नहीं दिख रहा है. हालांकि अगर जनता का रुझान इसकी तरफ आता है तो यह पार्टी बीजेपी को कुछ सीटों पर जरूर नुकसान पहुंचा सकती है. आपको बता दें 2019 के लोकसभा चुनाव में इस पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी को अपना समर्थन दिया था. लेकिन अब यह पार्टी कह रही है कि बीजेपी ने केवल हिंदुओं के साथ छल किया है और झूठ बोला है. इस पार्टी का कहना है कि हमने बीजेपी को CAA और NRC जैसे मुद्दों पर समर्थन दिया था, लेकिन अब हम बंगाल की सियासत में उतर कर खुद हिंदुओं की रक्षा करेंगे.

क्या हिंदू समहति TMC की ‘बी’ टीम है?

इस पार्टी ने जब से बंगाल के विधानसभा चुनाव में उतरने की बात की है तब से ही इस पर बीजेपी की तरफ से लगातार हमले हो रहे हैं और इसे ममता बनर्जी की ‘बी’ टीम बताया जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी ऐसा मानती है कि यह पार्टी केवल वोट कटवा पार्टी साबित होगी जो हिंदुओं का वोट बर्बाद करेगी. सोशल मीडिया पर इस पार्टी को लेकर कहा जा रहा है कि इसे टीएमसी की ओर से अच्छा खासा फंड दिया जा रहा है ताकि यह पार्टी बीजेपी को नुकसान पहुंचा सके. हालांकि असदुद्दीन ओवैसी के चुनाव मैदान में कूदने पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से भी उन्हें भारतीय जनता पार्टी की ‘बी’ टीम बताया गया था. लेकिन असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि वह बिहार में जीत कर आए हैं ओर बंगाल में भी जीतेंगे.

बंगाल में हिंदू-मुस्लिम का सियासी गणित समझिए

इस बार के बंगाल इलेक्शन में हिंदू-मुस्लिम का मुद्दा बेहद गर्म है, इसीलिए असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की AIMIM और हिंदू समहति जैसी पार्टियां विधानसभा चुनाव में अपनी सियासी रोटियां सेंकना चाहती हैं. पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की कुल आबादी 27% है जो लगभग 20 सीटों पर सीधा-सीधा असर डालती हैं. इन 20 सीटों पर मुसलमानों की आबादी 50 फ़ीसदी से अधिक है. इनमें मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तरी दिनाजपुर, जैसी सीटें शामिल हैं. वही दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना, बीरभूम जैसी सीटों पर भी मुसलमानों का अच्छा खासा प्रभाव है. माना जाता है कि मुसलमान ममता बनर्जी के साथ खड़े हैं लेकिन असदुद्दीन ओवैसी जब से इस चुनावी दंगल में कूदे हैं तब से मुसलमानों के टूटने की बात भी सामने आ रही है.

ममता पर लगते रहे हैं हिंदुओं के अपमान का आरोप

बीजेपी अब हिंदू वोटरों को एकजुट करने में जुटी हुई है और कुछ हद तक वह अपने इस मिशन में सफल भी हो चुकी है. इसका जीता जागता उदाहरण है 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का वोट परसेंट जो पहले से कफी ज्यादा बढ़ा था और वह 18 सीटें जीतने में कामयाब रही थी. भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का बयान अक्सर हिंदुओं के पक्ष में आता है वह कभी ममता सरकार को दुर्गा पूजा विसर्जन के लिए अनुमति न देने पर घेरते हैं तो कभी दीपावली और दशहरा के लिए. बीजेपी बंगाल के हिंदुओं मैं यह बात डालने में कामयाब होती दिख रही है कि वहां उनके हितों का हनन हो रहा है. ममता बनर्जी सरकार को कई बार दुर्गा पूजा विसर्जन जैसे मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट से भी फटकार खानी पड़ी है.

दिलचस्प होगा इस बार का चुनाव

बीजेपी पश्चिम बंगाल के चुनाव में पूरी मजबूती के साथ खड़ी है उसने 2 साल पहले से ही अपने बड़े नेताओं को पश्चिम बंगाल की जमीन पर भगवा लहराने के लिए लगा दिया है. उसमें नरोत्तम मिश्रा, कैलाश विजयवर्गीय, अर्जुन सिंह जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं. साथ ही बीजेपी का केंद्रीय कैडर वो चाहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या गृह मंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल का दौरा करते रहते हैं. इस बार पश्चिम बंगाल का चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है इसलिए चुनाव होने तक और उसके रिजल्ट आने तक सस्पेंस बरकरार रहेगा.

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