पश्चिम बंगाल (West Bengal) का कोयलांचल इलाका अवैध खदानों का गढ़ है. यहा ऐसी 400 से अधिक खदाने हैं जहां से अवैध रूप से कोयला निकाला जाता है और बाहार कोरोड़ों में तस्करी किया जाता है

ममता बनर्जी की सियासत पर लग जाएगी 'कोयले' की कालिख, CBI के घेरे में 'दीदी' का परिवार

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Election) जितनी तेजी से नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे नित नए मुद्दे भी आ रहे हैं. इन्हीं मुद्दों में से एक है कोयला तस्करी केस जिसने ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के सियासी रणनीति को कमजोर कर दिया है. दरअसल ममता पर बीजेपी पहले से ही भतीजावाद का आरोप लगा रही थी और अब उनका भतीजा और TMC का नेता अभिषेक बनर्जी CBI के निशाने पर है. अभिषेक के साथ-साथ उनकी पत्नी रुजिरा से भी सीबीआई पूछताछ कर रही है. CBI पूछताछ कर रही है या फिर अभिषेक पर आरोप हैं, ममता के लिए ये मुश्किल नहीं है. ममता के लिए मुश्किल है ये वक्त जो चल रहा है. इस वक्त से मतलब है कि आने वाले दो महीनों में होने वाले विधानसभा चुनाव. घोटालों और तस्करी के आरोपों ने देश में बड़े-बड़े सत्ताधीशों को गद्दी से नीचे ऊतार दिया है. ममता को डर है कि कहीं अभिषेक और उनकी पत्नी पर लगे आरोपों की वजह से उनकी भी गद्दी न चली जाए.

ममता बनर्जी इससे पहले शारदा चिटफंड मामले की वजह से पूरे देश में अपनी किरकिरी करा चुकी हैं. इस मामले में भी उनके नेताओं का नाम सामने आया था, इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को इसका बड़ा फायदा होते दिखा था. अब विधानसभा चुनावों से पहले उनके खुद के भतीजे और बहू पर लगा कोयला तस्करी का मामला कितना नुकसान पहुंचाएगा ये तो आने वाले कुछ महीनों में पता चल ही जाएगा.

पूरा मामला समझिए

पश्चिम बंगाल में एक इलाका है जिसे ‘कोयलांचल’ के नाम से पूरे देश में जाना जाता है. यह इलाका बर्दवान और रानीगंज में पड़ता है. यहां कोयले की बड़ी-बड़ी खदाने हैं. लेकिन यहां कुछ ऐसी खदाने हैं जिन्हें प्रशासन ने असुरक्षित समझ कर बंद कर दिया है. पिछले साल ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के विजिलेंस डिपार्टमेंट को मुखबिरों से पता चला कि इन बंद खदानों में कुछ गिरोह खुदाई कर रहे हैं और यहां से करोड़ो का कोयला तस्करी हो रहा है. इसी मामले में बीते साल नवंबर में सीबीआई ने एक एफआईआर दर्ज की और जब जांच हुई तो पता चला कि इसमें कई बड़े नाम शामिल हैं. सीबीआई ने इस मामले में सरगना अनूप मांझी ‘लाला’, विनय मिश्रा, ईसीएल के दो महाप्रबंधक और सुरक्षा अधिकारियों के नाम पर FIR दर्ज की है.

अभिषेक बनर्जी का नाम कैसै आया सामने

‘लाला’ को कोयलांचल का सबसे बड़ा कोयला माफिया माना जाता है. फिलहाल वो CBI की गिरफ्त से बाहर है. लेकिन इस मामले का दूसरा सबसे बड़ा आरोपी विनय मिश्रा ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है. यहां तक की वो TMC के युवा मोर्चा का भी सक्रिय सदस्य है. साथ ही वह अभिषेक की टीम का भी हिस्सा रह चुका है. यहीं से CBI की लिस्ट में अभिषेक बनर्जी का नाम आ गया. इस केस में फिलहाल ये दोनों मुख्य आरोपी फरार हैं जिनकी गिरफ्तारी के लिए CBI लगातार छापेमारी कर रही है.

अभिषेक की पत्नी और साली से पूछताछ

सीबीआई को इस मामले में शक है कि इस कोल तस्करी केस में पैसों का लेन-देन अभिषेक की पत्नी रुजिरा और उनकी बहन मेनका गंभीर के अकांउट से भी हुआ है. साथ ही रुजिरा बनर्जी की कंपनी लीप्स एंड बाउंड्स मैनेजमेंट सर्विस एलएलपी संदेह के घेरे में है. इसके कुछ बैंकिंग ट्रांजेक्शन्स पर भी सीबीआई को शक है, जिसके तार इस केस के आरोपियों से जुड़ रहे हैं. इस मामले में CBI ने दोनों को नोटिस दिया और पूछताछ के लिए बुलाया है. इस केस में दोनों से पूछताछ हो चुकी है. आपको बता दें पूछताछ से पहले ममता बनर्जी रुजिरा से मिलने खुद अभिषेक के घर पहुंची थीं. हालांकि CBI ने इस मामले में इन दोनों को आरोपी नहीं बनाया है. लेकिन चुनावी माहौल में किसी राजनीतिक परिवार से CBI की पूछताछ किसी मसले में बड़ी बात होती है और इसका जनता पर सीधा असर पड़ता है.

अभिषेक बनर्जी ने लगाए आरोप

अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी इस केस को लेकर शुरू से बीजेपी पर चुनावी रंजिश का आरोप लगाती रही हैं. उनका कहना है कि बीजेपी चुनावी फायदे के लिए CBI और ED का इस्तेमाल कर रही है. अभिषेक बनर्जी ने इस मामले पर कहा, “वे रोज मुझ पर हमला कर रहे हैं. वे कहते हैं कि जबरन भतीजे को हटाओ. मैंने पहले भी यह कहा है और मैं यहां कैमरों के सामने फिर से यही कह रहा हूं. यदि आप यह साबित कर सकते हैं कि मैं जबरन वसूली में शामिल हूं और यदि आप साबित कर सकते हैं कि मैं किसी गलत काम में शामिल हूं, तो आपको ईडी और सीबीआई को भेजने की जरूरत नहीं है. सार्वजनिक रूप से फांसी के फंदे पर चढ़ा दो, मैं मौत को गले लगा लूंगा.”

अवैध खदानों का गढ़ ‘कोयलांचल’

पश्चिम बंगाल का कोयलांचल इलाका अवैध खदानों का गढ़ है. यहा ऐसी 400 से अधिक खदाने हैं जहां से अवैध रूप से कोयला निकाला जाता है और बाहार कोरोड़ों में तस्करी किया जाता है. यहां से कोयला माफिया, कोयला निकाल कर उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और तमाम राज्यों में बेचते हैं. झारखंड बगल में है इसलिए मजदूरों की भी कमी नहीं होती. वहां से सस्ते कोयला मजदूरों को लाकर इन खादानों में झोंक दिया जाता है. इन खादानों में सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं है. इन्हें सरकार ने इसीलिए बंद कर दिया है क्योंकि यह अब सुरक्षित नहीं रह गई थीं. कहा जाता है कि यहां के अवैध खदानों में इस वक्त 25 हजार से ज्यादा मजदूर काम कर रहे हैं. इन खदानों से सालाना करोडों का कारोबार होता है.

पश्चिम बंगाल की सियासत में इसका इंपैक्ट क्या होगा

मौजूदा सरकार पर अगर भ्रष्टाचार के आरोप लगें तो चुनावों में इसके परिणाम काफी गंभीर होते हैं. हमारे पास ऐसे कई उदाहरण हैं जहां से हम यह देख सकते हैं कि अगर वर्तमान सरकार या उसके लोगों पर भ्रष्टाचार और घोटालों का आरोप लगा हो तो आने वाले चुनाव में वो सरकार गिर गई है. 2014 से पहले UPA सरकार इसका बड़ा उदाहरण है. इस सरकार पर भी 2G स्पेक्ट्रम, कोल घोटाला जैसे कई बड़े घोटालों के आरोप लगे और 2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा और उसकी सरकार औंधे मुह गिर पड़ी. वैसे ही उत्तर प्रदेश में मायावती की सरकार गिर गई थी जब उन पर कई घोटालों के आरोप लगे थे.

हालांकि इन आरोपों का अंत क्या होता है यह हम सबको पता होता है. लेकिन चुनावी माहौल में मौजूदा सरकार पर आरोप लगना ही उसके लिए सबसे बड़ा विश होता है, क्योंकि जनता को भी पता होता है कि धुंआ वहीं से उठता है जहां आग लगी होती है. अप्रैल-मई में बंगाल विधानसभा चुनाव हैं. यह पहली बार होने वाला है जब बंगाल में TMC का मुकाबला सीधे बीजेपी से होने वाली है. इससे पहले ये मुकाबला TMC और लेफ्ट में होता था लेकिन इस बार सब खेल बदल गया है और बीजेपी बंगाल में दीदी को कड़ी टक्कर देती दिख रही है.

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