2021 Assembly Elections Date: देश में होने वाले पांच राज्यों के चुनावों में बीजेपी ने फतह के लिए अपनी ताकत झोंक दी है. एक तरफ जहां असम में उसे सत्ता बचाए रखने की चुनौती है, तो बंगाल में कमल खिलाने के लिए उसने अपने सारे हथियार तैनात कर दिए हैं.

BJP: असम में सत्ता बचाने की चुनौती, बंगाल में कमल खिलाने को बेकरार, तमिलनाडु में इस प्लान पर जारी है काम

मौसम के चढ़ते तापमान के साथ अगले कुछ महीनों में देश का सियासी पारा भी चरम पर पहुंचने वाला है. आने वाले कुछ महीनों में देश के पांच राज्य पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की रणभेरी बजने वाली है. पूरे देश की निगाहें खासकर तीन राज्यों बंगाल, असम और तमिलनाडु में हो रही सियासी गतिविधियों पर टिकी हैं. केंद्र की सत्ता पर विराजमान बीजेपी, इन तीनों राज्यों में अपनी सियासी जमीन को और मजबूत करने की कोशिश में दमखम के साथ जुटी है. तीन में दो राज्य ऐसे हैं जहां बीजेपी का जनाधार अबतक बेहद ही कमजोर रहा है, लेकिन इस बार पार्टी इन राज्यों में मजबूती के साथ दखल देने की तैयारी में है.

एक तरफ जहां बंगाल में बीजेपी ने अपनी अबतक की सबसे बड़ी चुनावी मशीनरी को तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ चुनावी जंग में उतार दिया है. तो दूसरी ओर तमिलनाडु में बीजेपी ने AIADMK के साथ चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है. इन दोनों राज्यों के अलावा असम में भी चुनावी तपिश तेज होने लगी है और बीजेपी के राष्ट्रीय नेता मंचों से मुट्ठी भींचकर चुनावी समर का ऐलान कर चुके हैं. विधानसभा चुनाव की बढ़ती तपिश के बीच सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु बीजेपी के लिए इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं.

बंगालः दीदी के किले में सेंधमारी की कोशिश में बीजेपी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी और टीएमसी के बीच घमासान मचा है. बीजेपी यहां कमल खिलाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है और अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी है. 2016 के विधानसभा चुनाव में केवल तीन सीटें जीतने वाली बीजेपी के हौसले 2019 के लोकसभा चुनाव में 123 सीटों पर मिली बढ़त से सातवें आसमान पर हैं. लोकसभा चुनाव में उसने 42 में से 18 सीटों पर अपना विजयी पताका लहराया था. इस बढ़त के पीछे बड़ी वजह लेफ्ट के वोट बैंक का बीजेपी में शिफ्ट होना था.

जानकारों का मानना है कि लोकसभा चुनाव के दौरान वैचारिक रूप से बीजेपी के धुर-विरोधी लेफ्ट वोटर बीजेपी की तरफ झूके थे, तो इसके पीछे का बड़ा कारण यही था कि वो ममता बनर्जी को हर हाल में हराना चाहते थे. बीजेपी इसके दम पर ही इसबार के विधानसभा चुनाव में सत्तारुढ़ दल टीएमसी को कड़ी चुनौती देती हुए नजर आ रही है.

राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से पिछली बार 211 सीटें टीएमसी के खाते में गई थीं, कांग्रेस ने 44, लेफ्ट ने 26 और बीजेपी को तीन सीटों पर जीत मिली थी. जबकि अन्य ने दस सीटों पर जीत हासिल की थी. यहां बहुमत के लिए 148 सीटें चाहिए. बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने विकास के मुद्दों से इतर टीएमसी को आक्रमक चुनौती देने की योजना बनाई है और उसपर वो लगातार काम कर रही है. बीजेपी ने अपने संगठन के मजबूत लोगों के कंधे पर बंगाल की कमान सौंप रखी है.

खुद पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से लेकर गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार दौरे कर रहे हैं और पार्टी के पक्ष में माहौल तैयार करने की कोशिश में जुटे हैं. पूर्वोत्तर के राज्यों सियासी पैठ बनाने के बावजूद बीजेपी बंगाल में अबतक मजबूत दस्तक दे नहीं पाई है. इसलिए वो इसबार पूर्वेत्तर के द्वार कहे जाने वाले बंगाल के किले को भेदने के लिए उसने पूरा जोर लगा दिया है.

असम में सत्ता बरकरार रखने की चुनौती

पांच साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी असम में कमल खिलाने में सफल रही थी. इस बार भी वो पूर्वोत्तर के सबसे बड़े राज्य में अपनी बादशाहत को बरकरार रखने की कोशिश में जुट गई है. 2016 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने दम पर प्रदेश की 126 सीटों में से 60 पर कब्जा जमाया था. वहीं, अपने सहयोगी असम गण परिषद (एजीपी) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) की साझेदारी में कुल 86 सीटें पर जीत हासिल की थी.

CAA के पास होने के बाद असम में होने वाले चुनाव में मिली जीत बीजेपी सरकार के इस फैसले को और पुख्ता करेगी. इसलिए बीजेपी जीत दर्ज करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है. असम में इस बार मिली जीत से मोदी-शाह की जोड़ी के साथ काबिलियत का वो सितारा जुड़ जाएगा, जो गैर परंपरागत राज्यों में भी अपना आधिपत्य स्थापित कर लेगी.

दक्षिण में दहाई तक पहुंचने की कोशिश में बीजेपी

तमिलनाडु में सज रहे विधनासभा के चुनावी मंच पर बीजेपी ने भी बाकी सियासी दलों की तरह अपनी रणनीति को जमीन पर उतारने का काम शुरू कर दिया है. बीजेपी तमिलनाडु में सत्तारुढ़ दल AIADMK के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी. राज्य में बीजेपी की पूरी कोशिश अपने जनाधार को बढ़ाकर दहाई के आंकड़े को पार करने की है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, तमिलनाडु में बीजेपी ने 35 सीटों पर चुनाव लड़ने की ओर इशारा कर किया है. राज्य में अधिक-अधिक सीटों पर बढ़त हासिल कर बीजेपी भविष्य के लिए अपनी सियासी जमीन को उपजाउ बनाने की कोशिश में हैं.

देश में होने वाले पांच राज्यों के चुनावों में बीजेपी ने फतह के लिए अपनी ताकत झोंक दी है. एक तरफ जहां असम में उसे सत्ता बचाए रखने की चुनौती है, तो बंगाल में कमल खिलाने के लिए उसने अपने सारे हथियार तैनात कर दिए हैं. तमिलनाडु में वो अपने भविष्य की सियासत को मजबूत करने की योजना पर काम कर रही है.

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