Farmers Protest: केंद्र सरकार के तीन नए कानूनों (Farm Laws) का मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों किसान, तीन महीने से अधिक समय से दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

Farmers Protest:  केंद्रीय कृषि मंत्री तोमर बोले, सरकार कृषि कानूनों में संशोधन के लिए तैयार, लेकिन...

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर(File Photo)

केंद्र सरकार के तीन नए कानूनों (Farm Laws) को लेकर किसान पिछले तीन महीने से अधिक समय से विरोध कर रहे हैं और अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं. कई बार केंद्र सरकार से किसानों की बातचीत के बाद भी कोई हल नहीं निकल सका है. इस बीच केंद्रीय कृषि मंत्री (Agriculture Minister) नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ने कहा है कि सरकार किसानों की भावनाओं का सम्मान कर रही है और कृषि कानूनों में संशोधन के लिए तैयार है. साथ ही उन्होंने कृषि-अर्थव्यवस्था की कीमत पर इस मुद्दे को लेकर राजनीति करने और किसानों के हितों को नुकसान पहुंचाने के लिए विपक्षी दलों पर निशाना साधा है.

उन्होंने कहा कि सरकार ने कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने और किसानों को अपनी उपज कहीं भी बेचने की आजादी देने के लिए तीनों कानून बनाए. किसानों को इससे उनके द्वारा फसलों का निर्धारित मूल्य मिल सकेगा. तोमर ने कहा, ‘मैं यह मानता हूं कि लोकतंत्र में असहमति का अपना स्थान है, विरोध का भी स्थान है, मतभेद का भी अपना स्थान है, लेकिन क्या विरोध इस कीमत पर किया जाना चाहिए कि देश का नुकसान हो.’

उन्होंने कहा, ‘लोकतंत्र है तो राजनीति करने की स्वतंत्रता सबको है, लेकिन क्या किसान को मारकर राजनीति की जाएगी, किसान का अहित करके राजनीति की जाएगी, देश की कृषि अर्थव्यवस्था को तिलांजलि देकर अपने मंसूबों को पूरा किया जाएगा, इस पर निश्चित रूप से नई पीढ़ी को विचार करने की जरूरत है. पिछले साल सितंबर में संसद द्वारा पारित किए गए कानूनों से उन फसलों को उगाया जा सकेगा, जिन्हें बाजार में अधिक कीमत मिल सकते हैं.

केंद्र सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धः तोमर

किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए तोमर ने आश्चर्य जताया कि यह आंदोलन किसानों को कैसे लाभ पहुंचा सकता है. कोई भी इस पर बात करने के लिए तैयार नहीं है कि ये विरोध प्रदर्शन किसानों के हित में कैसे हैं? तोमर ने खेद व्यक्त किया कि किसान यूनियनों के साथ-साथ विपक्षी दल भी इन कानूनों के प्रावधानों में दोष बताने में विफल रहे हैं. कानूनों में संशोधन के सरकार के प्रस्ताव का मतलब यह नहीं है कि इन कानूनों में कोई कमी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है. सरकार की प्राथमिकता किसानों के सम्मान को बनाए रखना है और इसलिए, वह कानूनों में संशोधन करने के लिए तैयार है. हमेशा बड़े सुधारों का विरोध होता है, लेकिन इरादे और नीतियां सही होने पर लोग बदलाव स्वीकार करते हैं.

किसान आंदोलन के 100 दिन हो चुके पूरे

बीते दिन हजारों किसानों ने हरियाणा के कुछ स्थानों पर कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे को अवरुद्ध किया. दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन के 100 दिन पूरे होने पर किसानों ने रास्ता जाम करके अपना विरोध दर्ज कराया. मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों किसान, तीन महीने से अधिक समय से दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. वे नए कृषि कानूनों को रद्द करने और फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं.

केंद्र सरकार ने किसानों से 11 बार की बात

केंद्र सरकार और 41 प्रदर्शकारी किसान यूनियनों के बीच 11 दौर की वार्ता के बावजूद गतिरोध बरकरार है. सरकार ने 12-18 महीनों के लिए कानूनों के निलंबन और समाधान खोजने के लिए एक संयुक्त पैनल गठित करने सहित कई रियायतों की पेशकश की है, लेकिन किसान यूनियनों ने इसे अस्वीकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी को तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के कार्यान्वयन पर दो महीने के लिए रोक लगा दी थी और समिति से सभी हितधारकों से परामर्श करने के बाद एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था.

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