West Bengal chunav 2021: चंदन कहते हैं कि गैस सिलेंडर के लिए उन्होंने अभी फॉर्म भरा और वो जल्दी ही मिल जाएगा. आसपास के लोगों को गैस सिलेंडर मिल चुका है. 

बंगालः जिसका तीन मंजिला मकान उसे मिला घर बनाने को पैसा, हम 6 साल से फॉर्म भर रहे हैं पर अब तक नहीं मिला

घर बनाने के लिए मिलने वाली रकम नहीं मिली है- (सांकेतिक) (फोटो- टीएमसी घोषणा पत्र)

हल्दी नदी के किनारे बसा हल्दिया पश्चिम बंगाल का औद्योगिक इलाका है. मगर यहां के लोगों के पास भी रोजगार नहीं है. इसकी वजह से यहां के स्थानीय निवासी काम की तलाश में दूसरे शहरों का रूख करते हैं. हल्दिया रेलवे स्टेशन से बाहर को जाने वाली सड़क पर करीब दर्जन भर खाने-पीने की छोटी-छोटी दुकानें दिखती हैं. इनमें से ज्यादातर दुकानों पर महिलाएं दुकान चलाती हुई नजर आती हैं. दुकान की कमाई से ही ये लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने का प्रयास करती हैं.

मछली-चावल की दुकान चला रही एक महिला ने बताया कि उनके पति मजदूरी करते हैं. घर-परिवार का गुजारा हो जाए इसलिए पति-पत्नी दोनों काम करते हैं. हावड़ा के किसी होटल में काम करने वाले प्रशांत कहते हैं कि इधर बेकारी (बेरोजगारी) बहुत है.

राशन कार्ड है, लेकिन राशन नहीं मिलता

काम-धंधा नहीं होने के चलते इधर-उधर भटकना पड़ता है. 32 साल के प्रशांत कहते हैं कि काम तो छोड़िए, मेरा राशन कार्ड बना है, लेकिन मुझे राशन कभी-कभी ही मिलता है. वो कहते हैं कि दीदी तो मुख्यमंत्री है. इधर के लोग ही सब गड़बड़ कर देते हैं. इसकी वजह से कई योजनाओं का लाभ हमें नहीं मिलता.

60 वर्ष की उम्र को लगभग पार कर चुके शेक्खुद्दीन कहते हैं कि राशन कार्ड उनके पास भी है, लेकिन राशन नहीं मिलता. टीएमसी के द्वारे सरकार अभियान के बारे में वो कहते हैं कि हमारे यहां अभी तक कोई नहीं आया.

नहीं मिला आवास का पैसा

ऐसे ही एक व्यक्ति हैं चंदन. हल्दिया रेलवे स्टेशन से हल्दी नदी के घाट तक ई रिक्शा चलाते हैं. वो कहते हैं कि चुनाव में कौन जीतेगा, क्या होगा पता नहीं. चंदन को सरकार की ओर से घर बनाने के लिए मिलने वाली रकम नहीं मिली है. इसके लिए वो पांच-छह वर्षों से आवदेन कर रहे हैं. कहते हैं काउंसलर हर बार यही कहता है कि अभी सूची में नाम नहीं आया है.

चंदन भी इसके लिए स्थानीय प्रशासन को ही जिम्मेदार ठहराते हैं.चंदन कहते हैं कि जिनका तीन मंजिल का घर है, उसको घर बनाने के लिए पैसा मिला है, लेकिन हमें नहीं मिल रहा.

तृणमूल का दावा

ममता बनर्जी के नेतृत्व में तीसरी बार राज्य की सत्ता तक पहुंचने की कोशिश में जुटी तृणमूल कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में बांग्ला आवास योजना के तहत  33.7 लाख ग्रामीण परिवारों पक्का मकान बनाने के लिए प्रत्येक परिवार को 1.2 लाख रुपये देने का दावा किया है.

रसोई गैस सिलेंडर के लिए किया है आवेदन

चंदन कहते हैं कि गैस सिलेंडर के लिए उन्होंने अभी फॉर्म भरा और वो जल्दी ही मिल जाएगा. आसपास के लोगों को गैस सिलेंडर मिल चुका है. हल्दिया विधानसभा सीट से 2016 में सीपीएम के टिकट पर तापसी मंडल विधायक चुनी गईं थी. इस बार वो बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं. चंदन कहते हैं कि तापसी को काम नहीं करने दिया गया.

चंदन सड़क के किनारे एक बड़े से मैदान को दिखाते हुए बताते हैं कि यहीं मोदी आए थे. ममता बनर्जी और अमित शाह भी इस मैदान में आए थे, लेकिन सबसे अधिक भीड़ मोदी की रैली में थी.

2011 की जनगणना के अनुमान के अनुसार, कुल 324611 आबादी में से 36.54 प्रतिशत ग्रामीण हैं और 63.46 फीसदी शहरी आबादी है. अनुसूचित जाति ( SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) का अनुपात कुल आबादी से क्रमशः 23.03 और 0.5 फीसदी है.

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