इंटरनेशनल स्तर के खूंखार आतंकवादी को दबोचने के लिए हो रही माथापच्ची के दौरान, सीबीआई को एक तरफ कुआं और दूसरी ओर खाई साफ साफ दिख रही थी.

TV9 EXCLUSIVE : मुख्यमंत्री सहित 18 लोगों के हत्यारे को सड़क पर खराब खटारा कार में लिये खड़ी थी निहत्थी CBI

केंद्रीय जांच ब्यूरो

रुह कंपा देने वाला यह सच्चा किस्सा है अब से करीब 26 साल पहले का. मतलब करीब तीन दशक पहले की वो कहानी जिसमें, निहत्थी सीबीआई टीम के हारते-हारते “जीत” जाने का दिलचस्प किस्सा है. यह किस्सा है सन् 1995 के सितंबर महीने का. इस किस्से से चंद दिन पहले ही यानि 31 अगस्त 1995 को पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह और उनके साथ 17 लोगों को मानव बम विस्फोट में सरेशाम कत्ल कर डाला गया था. हत्यारों को पकड़ने के लिए पंजाब पुलिस और सीबीआई दर-दर खाली हाथ भटक रही थी. पड़ताल चूंकि पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के कत्ल की थी इसलिए हिंदुस्तानी हुकूमत ने जांच सीबीआई के हवाले कर दी.

सितंबर 1995 का वो संडे यानि छुट्टी वाला दिन था. उन दिनों सीबीआई के डीआईजी रहे एनकाउंटर स्पेशलिस्ट आईपीएस नीरज कुमार दिल्ली स्थित गोल्फ कोर्स में गए हुए थे. गोल्फ कोर्स में मौजूद दो मुखिबरों ने नीरज कुमार को जो खबर दी, उसे सुनकर एक बार को तो नीरज कुमार को ही काठ मार गया. मुखबिरी थी ही ऐसी सनसनीखेज कि किसी को भी उस पर पहली बार सुनने से विश्वास होना मुश्किल क्या, नामुमकिन सा था. खुद मुखबिर की खबर से मुतमईन हुए नीरज कुमार ने, उस समय सीबीआई निदेशक रहे अरुण भगत को पूरी बात बताई. चूंकि बात किसी राज्य के मुख्यमंत्री सहित 17 लोगों का एक लम्हें में कत्ल करवा डालने वाले मुख्य षडयंत्रकारी को दबोचने की थी.

सीबीआई के अधिकारी राज्य पुलिस से मदद लेने को नहीं हुए राजी

सो सीबीआई निदेशक भगत ने भी बिना किसी न-नुकुर के डीआईजी सीबीआई नीरज कुमार को कह दिया कि बब्बर खालसा इंटरनेशनल के इस खतरनाक खाड़कू को जैसे भी हो, तत्काल दबोचने की कोशिश करो. यह इजाजत देते वक्त मगर अरुण भगत ने इसका कोई रास्ता नहीं सुझाया कि इतने खतरनाक आतंकवादी को आखिर निहत्थी सीबीआई पकड़ेगी कैसे? बहरहाल सीबीआई डायरेक्टर से ग्रीन सिंग्नल मिलते ही नीरज कुमार ने उन दिनों मुंबई सीबीआई में तैनात विश्वासपात्र मातहत और सीबीआई के एसपी सतीश झा को भी उनकी टीम के साथ विशेष फ्लाइट से दिल्ली बुला लिया. नीरज कुमार ने दिल्ली पहुंचे सीबीआई एसपी सतीश झा को बताया कि पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड के मुख्य षडयंत्रकारी और बब्बर खालसा इंटरनेशनल के खूंखार खाड़कू जगतार सिंह तारा पर हाथ डालना है. तारा इन दिनों दक्षिणी दिल्ली में ही छिपा हुआ है.

सामने मुश्किल यह थी कि सीबीआई के दोनों अधिकारी किसी भी राज्य पुलिस से मदद लेने को राजी नहीं थे, जबकि खाड़कू जगतार सिंह तारा हर समय अपने पास एके-56 जैसी घातक राइफल और साइनाइड कैप्सूल रखता था. सीबीआई की सबसे बड़ी दूसरी समस्या थी कि जांच एजेंसी होने के नाते उसके अफसर कर्मचारी हथियाबंद नहीं होते थे. सीबीआई के अफसर और कर्मचारी हमेशा निहत्थे ही रहते थे, जबकि एके-56 से लैस खाड़कू से टकराने का मतलब तो आरपार की लड़ाई थी. जिंदगी और मौत का फैसला मौके पर ही होना था. यानि कि खूंखार शिकार सामने और शिकारी निहत्थे थे. फिर भी शिकारी यानि सीबीआई टीम किसी भी कीमत पर शिकार को अपने जबड़े से जिंदा, दूर भेजने को राजी नहीं थी.

CBI ने दिल्ली में बनाई आतंकवादी को पकड़ने की रणनीति

मरता क्या नहीं करता वाली कहावत में फंसी सीबीआई टीम प्रमुख नीरज कुमार ने अंतत: वही किया, जो करने से पहले उन्हें सौ बार सोचना चाहिए था, मगर सोचा नहीं. नीरज कुमार जानते थे कि अगर इस बार जीत गए तो वो उनकी पुलिसिया नौकरी में जिंदगी की सबसे बड़ी जीत होगी. अगर हारे तो वो हार जिंदगी का आखिरी दिन भी साबित हो सकती है. नीरज कुमार ने सतीश झा के साथ मुंबई से दिल्ली पहुंचे बाकी सीबीआई अफसर रमण त्यागी, डी के परदेसी और नायर के साथ दिल्ली स्थित अपने सरकारी बंगले पर ही रणनीति बना डाली. मीटिंग में मुश्किल सवाल यह आया कि एके-56 और साइनाइड कैप्सूल से लैस आतंकवादी तारा से आंखें मिलने पर, सीबीआई की टीम में से उसे सबसे पहले दबोचने की हिमाकत कौन और कैसे करेगा?

आतंकवादी तारा ने सीबीआई टीम पर गोलियां दागीं तो सब मारे जाएंगे. अगर उसने साइनाइड खाकर अपनी जान दे दी, तब भी सीबीआई की दुर्गति तय थी. मतलब बब्बर खालसा के उस इंटरनेशनल स्तर के खूंखार आतंकवादी को दबोचने के लिए हो रही माथापच्ची के दौरान, सीबीआई को एक तरफ कुआं और दूसरी ओर खाई साफ साफ दिख रही थी. बहरहाल मरता क्या नहीं करता वाली कहावत पर अमल करते हुए सीबीआई टीम प्रमुख नीरज कुमार ने मुंबई से पहुंची सीबीआई टीम और अपनी सुरक्षा में तैनात दिल्ली पुलिस के सिपाही धरमवीर सिंह, सुरेंद्र सिंह, उन दिनों दिल्ली ट्रैफिक पुलिस में तैनात सहायक उप-निरीक्षक अंचल सिंह, सीबीआई एसटीएफ में तैनात एसपी एच.सी. सिंह, सहायक उप निरीक्षक हवा सिंह को साथ लिया.

गुरिल्ला स्टाइल में खाड़कू तारा को CBI ने दबोचा

हालांकि, दिल्ली पुलिस ट्रैफिक विंग में तैनात एएसआई अंचल सिंह का उन दिनों सीबीआई से कोई वास्ता दूर दूर तक नहीं था. वे तो उस दिन अचानक ही बे-वजह नीरज कुमार से मिलने जा पहुंचे थे. फिर भी जब नीरज कुमार ने उन्हें अपने ऑपरेशन में शामिल होने का प्रस्ताव दिया. तो थानेदार अंचल सिंह इंकार नहीं कर सके. इसके बाद निहत्थे ही सीबीआई की टीम बब्बर खालसा के उस खूंखार खाड़कू जगतार सिंह तारा को दबोचने दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव की गलियों में निकल पड़ी. जैसे ही खाड़कू तारा से सीबीआई टीम की आंखें मिलीं, गुरिल्ला स्टाइल में उसे जिंदा ही दबोच भी लिया गया. उसके साथ मौजूद दूसरे साथी को भी पकड़ लिया. सीबीआई टीम आतंकवादी तारा को लेकर निहत्थी ही, अपने दफ्तर की ओर निकल पड़ी. इससे भी ज्यादा खतरनाक घटना रास्ते में तब घटी जब, खालिस्तानी खाड़कू को लेकर सीबीआई टीम अपने दफ्तर लौट रही थी. रास्ते में सीबीआई टीम की खटारा कार खराब हो गई जिसमें इतने खूंखार आतंकवादी को बैठाकर वो वापिस लौट रही थी.

मतलब दिल्ली की भीड़ भाड़ वाली सड़क पर निहत्थी सीबीआई टीम उस खूंखार खाड़कू को लिए बेबस सी खड़ी थी, जिसने पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह सहित 17-18 लोगों को एक लम्हे में मानव बम से (आरडीएक्स) उड़वा डाला था. इस बात को सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर और फिर दिल्ली पुलिस कमिश्नर रहे नीरज कुमार भी मानते हैं.बातचीत के दौरान नीरज कुमार ने कहा, “26 साल पहले उस छापे में निहत्थी सीबीआई टीम का साथ वक्त और भगवान ने ही दिया था. कदम कदम पर वक्त हमारी परीक्षा ले रहा था. हमें हर जीत में हार और हर हार में जीत दिखाई पड़ रही थी. मैंने सोच लिया था कि उस दिन अगर मेरी टीम हारती तो वो हार पूरी सीबीआई जांच एजेंसी की होती और अगर उस दिन हमारी जीत हुई तो, वो सीबीआई और पूरी हिंदुस्तानी हुकूमत की यादगार जीत थी.”

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