पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने कहा कि विश्वास करें या नहीं करें, ‘खेला होबे’ (Khela Hobe) नारा अब बहुत ही लोकप्रिय हो गया है. संसद में भी ‘खेला होबे’ का नारा दिया जा रहा है.

West Bengal: और अब ममता बनर्जी ने खेला फुटबॉल, 'खेलाश्री' योजना का किया शुभारंभ, कहा-'खेला होबे' हो गया है लोकप्रिय'

फोटोः नेताजी इंडोर स्टेडियम में फुटबॉल फेंकती ममता बनर्जी.

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने सोमवार को कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में ‘खेला होबे’ (Khela Hobe) कार्यक्रम की शुरुआत की शुरुआत की. इसके साथ ही ऐलान किया कि प्रत्येक साल 16 अगस्त को ‘खेला होबे दिवस’ (Khela Hobe Diwas) का पालन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि अभी खेला कम हुआ है. हर राज्य में खेला होगा. यह संसद से लेकर दिल्ली, राजस्थान और गुजरात तक देश के सभी हिस्सों में बहुत लोकप्रिय हो गया है. इस अवसर पर स्वास्थ्य इंगित परियोजना का भी उद्घाटन किया. IFA ने बंगाल फुटबॉल टीम के लिए नई जर्सी का भी उद्घाटन किया.

बता दें कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यह भी घोषणा की है कि 16 अगस्त को ईडन गार्डन्स में 1980 के खेल के दौरान भगदड़ में मारे गए 16 फुटबॉल प्रशंसकों की याद में राज्य भर में ‘खेला होबे दिवस’ (Khela Hobe Diwas) के रूप में मनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस तरह दिन समर्पित करने से खेल भावना को बढ़ावा मिलेगा.


‘खेला होबे’ नारा बहुत ही हुआ है लोकप्रिय

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘खेला होबे’ नारा अब बहुत लोकप्रिय है. यह नारा अन्य राज्यों में भी दिया जा रहा है. अभी बहुत कम खेला हुआ है. आगे और भी मैच खेले जाएंगे. उन्होंने कहा कि बंगाल ने रास्ता दिखाया है. अब खेला होबे का नारा संसद में भी लग रहा है. उन्होंने कहा कि कई स्टेडियमों का निर्माण, जीर्णोद्धार, मल्टीजीम, इनडोर स्टेडियमों में किया जाएगा. 25 हजार क्लबों को 5 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा. मैंने कम्युनिटी पुलिस प्रोग्राम में हजारों लड़के-लड़कियों को मदद की है. राज्य भर के कोचिंग क्लबों की मदद की गई है. आईएफए के अधीन 300 क्लबों को फुटबॉल दिया जाएगा.

माओवादी हिंसा के शिकार परिवार को दी नौकरी

एक समय राज्य के जंगल क्षेत्रों में माओवादी हमलों में बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे। छोड़े गए या मुख्यधारा में लौटने वाले माओवादियों में से 220 को विशेष होमगार्ड के रूप में तैनात किया गया है. अब तक 2,000 लोगों को नौकरी दी जा चुकी है, जिनमें 1,300 पूर्व माओवादी और 500 से अधिक जिनके परिवार के सदस्य माओवादी हमलों में मारे गए हैं. जिन्हें आज नौकरी मिली, उनमें पश्चिम मिदनापुर के 110 लोग, झाड़ग्राम के 60 लोग, बांकुड़ा के 11 लोग तथा पुरुलिया के19 लोग शामिल थे. उन्होंने कहा कि करीब 40,000 लोगों को नौकरी दे चुकी हूं.

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